मेरे चाचा का सपना सच हो गया


                               एक संघर्ष की कथा मेरे चाचा की आज एक सत्य कहानी सुनाता हूँ....
मेरी दादी का सरस्वती पूजा के दिन देहांत हो गया था...और हमलोंग तभी से सरस्वती पूजा नहीं मनाते थे ये सिर्फ एक साल ही हुआ था की तभी हमलोगों के घर 1995 में मेरा भाई Chetan Anand का जन्म हुआ जो मेरे चचेरे चाचा #विद्याधर_सरकार का बड़ा बेटा...और फिर हमलोंग सरस्वती पूजा मानाने लगें...
मेरे चाचा अपने भाई में तीसरे स्थान पे थे और अपने भाई के बीच ज़मीन का बंटबारा फिर थोड़े से जमीन में अपना खेती कर गुजरा करने लगे लेकिन उन्हें अपने बच्चे के भविष्य की चिंता थी...वह समझ गए की इन खेती से उनकें बच्चें का भविष्य नहीं बनने वाला था....और वह 1997 में मधेपुरा आ गए और Amit Saraf के यहाँ एक प्राइवेट नौकरी करने लगे.
5000/- रु मासिक पे इन्होंने अपना काम ईमानदारी पूर्वक करने लगे Chetan Anand (विक्की) बचपन से ही पढ़ने में अब्बल रहता था हमेसा अपने क्लास में प्रथम आता मेरे चाचा अपने बच्चे के पढाई में कोई कसर नहीं छोड़ते थे...
2012 जब वह XII 84% से पास होने के बाद वह #JEE_Main की तैयारी के लिए पटना चला गया...मेरे चाचा के सामने उनकी बेटी और मेरी बहन Deepa Dixit की भी जबाबदेही थी वह भी पढने में अब्बल ख़ैर सभी का साथ और ऑवर टाइम नौकरी कर के अपना कर्तव्य का निर्वाह करते रहें......और साथ ही Amit Saraf का पुरा सहयोग मेरे चाचा को उनके बच्चें के पढाई मिलता रहा...
तभी पटना में Chetan Anand का तबियत ख़राब हो गया और वह #JEE_Main के Exm में किसी तरह बैठा लेकिन अच्छा रैंक नहीं ला सका...और वह एक और चांस लेना चाह रहा था और कोटा जा कर तैयारी करने की बात अपने पापा को बोला... चाचा बोले ठीक है लेकिन एक समस्या थी कैसे.....?
जिसे कुछ करने की चाहत होती है उसे कोई नहीं रोक सकता मेरे चाचा अपने हालात और पारिस्थिति से समझौता कर ही रहे थे...एक और समझौता कर के किसी तरह उसे कोटा भेज दिए #JEE_Main का Exm आया और इस वार वह अच्छे रैंक से निकल लिया...
फिर क्या था एक ख़ुशी का माहोल बना और फिर उसका दाखिला #IIT_Kharagpur में हो गया...
और Chetan Anand इसी साल Engineer बन कर,गोवा में #Vedanta_Limited में जॉब कर रहा है...और मेरी बहन
Deepa Dixit,#Birla_Institute_Of_Technology_Meshra .में अपनी पढाई कर रही है...
आज इन्हें देख कर बहुत ख़ुशी होती है और एक सिख भी... की जो बच्चें पढ़ने वाले होते है उन्हें खुल कर मदद करें...पेरेट्स अपने बच्चों को आगे बढ़ने के लिए नहीं रोके....
मैं अपने चाचा और चाची को प्रणाम करता हूँ की बहुत तकलीफ काट के इन्होंने अपने बच्चें को पढ़ाये....लेकिन यह सत्य घटना आपको किसी #News_Portal पे और ना ही किसी #न्यूज़_पेपर में नहीं मिलेगा ...क्योंकि मेरे चाचा एक साधरण इंसान की तरह रहें आज भी उन्हें शाम को पैदल आप मधेपुरा के सड़को पे सामान का ऑडर लेते देख सकतें है...
और आज मेरे चाचा का सपना सच हो गया...
एक प्रेरणा बन कर अगर कुछ इनसे सीखें और अपने बच्चों को स्मार्ट मोबाइल की अहमियत ना दे कर शिक्षा की अहमियत बताए तो बड़ी बात होगी....
इसे जरुर पढ़ें और प्रेरणा ले...

By- Hemant Sarkar

You May Also Like

0 comments