Friday, May 25, 2012

GPRS Settings



Mobile Operator Access Point Name (APN)

AirTel ---------------------airtelgprs.com
Idea -----------------------internet
Tata Docomo---------------TATA.DOCOMO.INTERNET
Reliance GSM --------------rcomnet
Vodafone -------------------www
BSNL ----------------------bsnlnet
Aircel ----------------------aircelgprs
Uninor ---------------------uninor

Friday, March 2, 2012

हमें जरुरत है अपने कंप्यूटर की सुरक्षा की

आज हमें जरुरत है अपने कंप्यूटर की सुरक्षा की पर कैसे?

एथिकल हैकिंग एक ऐसा कोर्स है जो साइबर स्पेस में हैकिंग की समस्या से आपको निजात दिलाएगा। नई होने के कारण यह फील्ड बेहद एक्साइटिंग है, जिसके एक्सपर्ट की मांग आनेवाले समय में निश्चित रूप से और बढ़ेगी। जैसे-जैसे इंटरनेट पर लोगों की निर्भरता बढ़ती जा रही है, नेटवर्क सिक्योरिटी एक चुनौती बनती जा रही है। इस लिहाज से आने वाले दिनों में एथिकल हैकर्स कीडिमांड उम्मीद से कहीं ज्यादा होगी। हरेक कंपनी अभी से एथिकल हैकर्स को रखने लगी हैं। भले ही अपने देश में अभी ऐसे पाठ्यक्रम का उतना चलन नहीं है, पर विदेशों में बाकायदा अब सरकारी इंस्टीट्यूट भी इस कोर्स को सिखाने लगे हैं। एथिकल हैकर्स इंटरनेट की दुनिया के अपराधियों के दिलोदिमाग को समझने के लिए खुद को तैयार रखते हैं, ताकि अपराध करने की उनकी तकनीक को समझा जा सके और साथ ही उन अपराधों से बचने के अचूक उपाय भी खोजे जा सकें।

एथिकल हैकर ऐसा व्यक्ति होता है जो कानूनी तौर पर हैकिंग से बचने के लिए अपने सिस्टम को चुस्त बनाता है। ऐसे लोगों में क्रिमिनल की तरह ही सोचने की क्षमता होनी चाहिए, ताकि अपराधियों के दिमाग को समझा जा सके और उनके अटैक से सिस्टम को बचाया जा सके। उसे कंप्यूटर के टूल्स और टेक्नीक का गहन ज्ञान होना चाहिए। इस फील्ड में कामयाबी के लिए हैकर को कंप्यूटर की गहरी जानकारी के अलावा इंटरनेट की बारीकियों से भी अवगत होना जरूरी है। साइबर क्राइम और एथिकल हैकिंग के बारे में अपडेट रहने से भी हैकर को काफी मदद मिलती है। ई-मेल ट्रेस करना, नेटवर्क हैक करना, इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी चुराना और फायरवाल को उड़ाने का बेसिक ज्ञान एथिकल हैकर्स के लिए जरूरी है।

आज इन्ही सब को ले कर बिहार इंटरनेट सिक्यूरिटी ग्रुप हिन्दुस्तान के प्रसिद्ध एथिकल हैकर राहुल त्यागी जी जो चंडीगढ़ के है.बिहार में पहली पर एक सेमिनार का आयोजन २१ और २२ अप्रैल २०१२ को करने जा रही है विस्तृत जानकारी के लिए हमारे बेबसाइट को देखे और हमें संपर्क करे.

http://bisg.technobee.in

Wednesday, February 22, 2012

Internet Security & Anti-Hacking Great

आज इन्टरनेट हमारे जीवन और कैरियर का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा तो इसकी सुरक्षा के विषय में जानना बहुत जरुरी है,यह सेमिनार इसी जानकारी के लिए है.
यह सेमिनार 16 घंटे का होगी और किस बिंदु पर यह क्लास होगी इसे हम जाने......
एथिकल हैकर एक तरह से आईटी सिक्योरिटी प्रोफेशनल होता है। उसमें वह सभी खूबियां होती है जो एक हैकर में होती है, लेकिन इन खूबियों का इस्तेमाल वह क्रेक्किंग में न करके कंप्यूटर और साइबर वर्ल्ड में सुरक्षात्मक उद्देश्यों के लिए करते हैं। इन्हें सुरक्षा विश्लेषक, पैनीट्रेशन टेस्टर्स या वाइटहैट हैकर भी कहा जाता है। ये कंपनी के इंफोरमेशन सिस्टम को ब्लैकहैट हैकर्स से सुरक्षित रखते हैं। अकसर ब्लैकहैट हैकर कंपनी के आईटी नेटवर्किंग सिस्टम या सर्वर में तकनीकी घुसपैठ कर उसे नुकसान पहुंचाते हैं। इन गड़बडिय़ों को रोकना इन्हीं प्रोफेशनल्स का काम होता है। कंपनी के कंप्यूटर नेटवर्क एक्सेस की सुरक्षा नीतियां क्या होंगी, इसकी जिम्मेदारी भी इन्हीं लोगों की होती है। इन नीतियों में इंटरनेट एक्सेस मैथड्स, पासवर्ड यूसेज और सर्वर द्वारा डाटा एक्सेस आदि शामिल होते हैं। साइबर सिक्योरिटी विशेषज्ञों की पूरे संसार में काफी मांग है। आज सभी संस्थान, जिनमें बैंक, होटल्स, एयरलाइंस, टेलिकॉम कंपनियां, आईटी कंपनियां, आउट सोर्सिंग यूनिट्स, सरकारी एजेंसियां आदि शामिल हैं, जिन्हें साइबर सिक्योरिटी एक्सपर्ट की जरूरत होती है।
ये गर्व की बात है की आज बिहार में पहली बार इस तरह का सेमिनार का आरम्भ मधेपुरा भूपेंद्र नारायण विश्वविध्यालय से हो रही है.हिंदुस्तान के जाने माने साइबर एक्टपर्ट राहुल त्यागी इन्टरनेट सिक्योरिटी के बिषय में दो दिवसीय एक सेमिनार कर रहे है जिसमे मधेपुरा के जिलाधिकारी पुलिसकर्मियों के साथ तमाम आईटी सेक्टर के लोग अपनी-अपनी भागीदारी दे रहे है।
ज्यादा जानकारी के लिए इन ब्लोग्स को देख सकते है...
http://biharinternetsecuritygroup.blogspot.in/

Thursday, May 5, 2011

कंप्यूटर वायरस क्या होता है?

कंप्यूटर वायरस क्या होता है?

कंप्यूटर वायरस एक छोटा सॉफ़्टवेयर प्रोग्राम होता है जो एक कंप्यूटर से किसी अन्य कंप्यूटर में फैलता है और जो कंप्यूटर कार्रवाई को बाधित करता है. कंप्यूटर वायरस कंप्यूटर पर मौजूद डेटा को दूषित कर सकता है या हटा सकता है, वायरस को अन्य कंप्यूटर पर फैलाने के लिए ई-मेल प्रोग्राम का उपयोग कर सकता है या हार्ड डिस्क पर मौजूद प्रत्येक चीज़ को हटा भी सकता है.

कंप्यूटर वायरस सबसे आसानी से ई-मेल संदेशों में मौजूद अनुलग्नकों या त्वरित संदेश सेवा संदेशों द्वारा फैलते हैं. इसलिए, आपको तब तक कभी भी किसी ई-मेल अनुलग्नक को नहीं खोलना चाहिए जब तक आपको पता न हो कि संदेश किसने भेजा है या जब तक आप ई-मेल अनुलग्नक की अपेक्षा न कर रहे हों. कंप्यूटर वायरस का मनोरंजक छवियों, ग्रीटिंग कार्ड या ऑडियो और वीडियो फ़ाइलों के अनुलग्नकों के रूप में छुपाया जा सकता है. कंप्यूटर वायरस इंटरनेट पर डाउनलोड का उपयोग करके भी फ़ैलते हैं. कंप्यूटर वायरस पाइरेटेड सॉफ़्टवेयर या आपके द्वारा डाउनलोड किए जा सकने वाली अन्य फ़ाइलों या प्रोग्राम में छुपे हो सकते हैं.

कंप्यूटर वायरस के लक्षण

अगर आपको संदेह या निश्चय है कि आपका कंप्यूटर किसी कंप्यूटर वायरस से संक्रमित है तो वर्तमान एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर प्राप्त करें. निम्न कुछ प्राथमिक संकेतक हैं जिनसे कंप्यूटर संक्रमित हो सकता है:

  • कंप्यूटर प्रायः से धीमा चलता है.
  • कंप्यूटर प्रतिसाद करना बंद कर देता है या वह बार-बार लॉक हो जाता है.
  • कंप्यूटर क्रैश हो जाता है और फिर वह प्रत्येक कुछ मिनट में पुनः प्रारंभ हो जाता है.
  • कंप्यूटर अपने आप पुनः प्रारंभ हो जाता है. अतिरिक्त रूप से, कंप्यूटर हमेशा की तरह नहीं चलता.
  • कंप्यूटर पर मौजूद अनुप्रयोग सही तरीके से कार्य नहीं करते हैं.
  • डिस्क या डिस्क ड्राइव पहुँचने योग्य नहीं होती हैं.
  • आप आइटम को सही तरीके से मुद्रित नहीं कर सकते हैं.
  • आप असामान्य त्रुटि संदेश देखते हैं.
  • आप विकृत मेनू और संवाद बॉक्स देखते हैं.
  • आपके द्वारा हाल ही में खोले गए अनुलग्नक में दोहरी एक्सटेंशन है, जैसे .jpg, .vbs, .gif या .exe. एक्सटेंशन.
  • एंटीवायरस प्रोग्राम बिना किसी कारण अक्षम होता है. अतिरिक्त रूप से, एंटीवायरस प्रोग्राम पुनः प्रारंभ नहीं किया जा सकता.
  • एंटीवायरस प्रोग्राम कंप्यूटर पर स्थापित नहीं किया जा सकता या एंटीवायरस प्रोग्राम कार्य नहीं करेगा.
  • डेस्कटॉप पर नए चिह्न प्रकट होते हैं जो आपने वहाँ नहीं रखे थे या वे चिह्न किसी भी हाल में स्थापित किए गए प्रोग्राम से संबद्ध नहीं हैं.
  • स्पीकर से अनपेक्षित रूप से अजीब ध्वनियाँ या संगीत चलता है.
  • कंप्यूटर से प्रोग्राम गायब हो जाता है चाहे आपने जानबूझकर प्रोग्राम को नहीं निकाला था.

नोट ये संक्रमण के सामान्य चिह्न हैं. हालाँकि, ये चिह्न हार्डवेयर या सॉफ़्टवेयर समस्याओं के कारण भी हो सकते हैं जिनका कंप्यूटर वायरस से कुछ लेना-देना नहीं है. जब तक आप Microsoft दुर्भावनापूर्ण सॉफ़्टवेयर निष्कासन उपकरण नहीं चलाते और फिर आप अपने कंप्यूटर पर उद्योग-मानक, अद्यतित एंटीवायरस सॉफ़्टवेयर को स्थापित नहीं करते हैं, तब तक आप निश्चित नहीं हो सकते कि कंप्यूटर किसी कंप्यूटर वायरस से संक्रमित है या नहीं.

Saturday, April 30, 2011

लौकी का ज्यूस

क्षमता से ज्यादा काम और मानसिक तनाव के कारण आजकल दिल से सम्बन्धित रोग बढ़ते जा रहे हैं। हर दिन कोई भी एक नया व्यक्ति दिल के रोग से पीडि़त मिल ही जाता है। किसी-किसी को तो ये रोग इतने ज्यादा हद तक होजाते हैं कि उनका इलाज केवल एन्ज्योग्राफी या बायपास सर्जरी ही होता है। अगर आप इन रोगों से बचना चाहते हैं तो लौकी का रस आपकी बहुत मदद कर सकता है। अगर आपको दिल से सम्बन्धी कोई भी बीमारी हो तो लौकी का रस जरूर पिएं।

लौकी का ज्यूस बनाने की विधि- सबसे पहले लौकी को धो ले फिर उसे कद्दूकस कर लें। कद्दूकस की हुई लौकी में सात तुलसी के पत्ते और पांच पुदीने की पत्तियां डाल कर उसे मिक्सर में पीस लें। रस की मात्रा कम से कम 150 ग्राम होनी चाहिए। अब इस रस में बराबर मात्रा में पानी मिलाकर तीन चार पिसी काली मिर्च और थोड़ा सा सेंधा नमक मिलाकर पिऐं।

रस को पीने की विधि- यह रस किसी भी दिल के मरीज को दिन में तीन बार सुबह, दोपहर और शाम को खाने के बाद पिलाना चाहिए। शुरूआत के दिनों में रस कुछ कम मात्रा में लें और जैसे ही वह अच्छे से पचने लगे इसकी मात्रा बढ़ा दें।

विशेष- लौकी का रस पेट के विकारों को मल के द्वारा बाहर निकाल देता है। जिसके कारण शुरूआत में पेट में गडग़ड़ाहट और खलबली मच सकती है इससे घबराएं नहीं कुछ समय बाद यह अपने आप ठीक हो जाएगा। इस रस को पीने के साथ मरीज का अपनी पहले से चल रही दवाईयों को भी चालू रखना चाहिए पहले से चल रही दवाईयों को एकदम न छोड़ें।

ऐलोपैथी का एकछत्र साम्राज्य

यद्यपि ऐलोपैथी का एकछत्र साम्राज्य दुनियाभर के देशों पर नजर आता है पर इसका यह अर्थ बिल्कुल नही कि यह औषध सिद्धांत सही है। ‘दवा-लॉबी ’ का गढ़ माने जाने वाले अमेरीका की दशा इन दवाओं के कारण इतनी खराब है कि वहां के कई ईमानदार चिकित्सक इन्हें किसी महामारी से अधिक खतरनाक मानने लगे हैं।

विश्व प्रसिद्द स्वास्थ्य साईट “Mercola .com ” के अनुसार अमेरिका में 2,25,000 लोग हर साल ऐलोपैथिक चिकित्सा के कारण मर जाते हैं। दवाओं के बुरे प्रभाव को आजीवन भोगने वालों की गिनती इन मृतको से कहीं अधिक है। जब अमेरीका की यह दुर्दशा है तो दुनिया के अन्य देशों के कितने लोग इन दवाओं के बुरे प्रभावों का शिकार बनें और असाध्य कष्ट भोग रहें हैं, इसका अनुमान कठिन है। यह संख्या करोड़ो में हो सकती है।

डॉ जोसैफ मैरकोला द्वारा इस की विस्तृत और प्रमाणिक जानकारी दी गई है। बड़ी दवा कंपनियों पर ये आरोप लगते हैं कि ये शक्तिशाली दवा माफिया अपने हथकण्डों के दम पर दुनिया को अपनी घातक दवाएं खाने पर बाध्य कर रहा है।

प्रश्न यह है कि आखिर केवल ऐलोपैथी की दवाओं के ही इतने घातक प्रभाव क्यों होते हैं ? बीसीयों प्राचीन पद्धतियाँ संसार में प्रचलित हैं , उनमें से तो किसी की दवाएं बार-बार वापिस लेने या बन्द करने की, उनपर प्रतिबन्ध लगाने की कभी जरूरत नहीं पड़ी। जबकि ऐलोपैथिक दवा निर्माता हानिकारक दवाओं के घातक प्रभावों के ओरोपों के चलते कई बिलियन डालर जुर्माना अदा कर चुके हैं। वास्तव में एलोपेथी की दवाओं के निर्माण का सिद्धांत ही दोषपूर्ण है। इसे जानने समझाने से पूरा चित्र स्पष्ट हो जाता है ।

विषाक्तता का सिद्धांत :-

आयुर्वेद तथा सभी चिकित्सा पद्धतियों में मूल पदार्थों यथा फल, फूल, पत्ते, छाल, धातु, आदि को घोटने, पीसने, जलाने, मारने, शोधन, मर्दन, संधान, आसवन आदि क्रियाओं में गुजारा जाता है। इनमें ‘एकल तत्व पृथकीकरण’ का सिद्धांत है ही नहीं। विश्व की एकमात्र चिकित्सा प(ति ऐलोपैथिक है जिसमें ‘एकल तत्व पृथकीकरण’ का सिद्धांत और प्रकिया प्रचलित है। इसकी यही सबसे बड़ी समस्या है। एक अकेले साल्ट, एल्कलायड या सक्रीय तत्व के पृथकी करण ; (single salt sagrigation) से प्रकृति द्वारा प्रदत्त पदार्थ का संतुलन बिगड़ जाता है और वह विषकारक हो जाता है। हमारे चय-अपवय ;(metabolism) पर निश्चित रूप से विपरीत प्रभाव डालने वाला बन जाता है।

वास्तव मे इस प्रक्रिया में पौधे या औषध के प्रकृति प्रदत्त संतुलन को तोड़ने का अविवेकपूर्ण प्रयास ही सारी समस्याओं की जड़ है। पश्चिम की एकांगी, अधूरी, अनास्थापूर्ण दृष्टी की स्पष्ट अभिव्यक्ति ऐलोपैथी में देखी जा सकती है।

अंहकारी और अमानवीय सोच तथा अंधी भौतिकतावादी दृष्टी के चलते केवल धन कमाने, स्वार्थ साधने के लिये करोड़ों मानवों (और पशुओं) की बली ऐलोपैथी की वेदी पर चढ़ रही है। एकात्म दर्शन के द्रष्टा स्व. दीनदयाल उपाध्याय के अनुसार पश्चिम की सोच एकांगी, अधूरी, असंतुलित अमानवीय और अनास्थापूर्ण है। जीवन के हर अंग को टुकड़ों में बाँटकर देखने के कारण समग्र दृष्टी का पूर्णतः अभाव है। प्रत्येक जीवन दर्शन अधूरा होने के साथ-साथ मानवता विरोधी तथा प्रकृति का विनाश करने वाला है। ऐलोपैथी भी उसी सोच से उपजी होने के कारण यह एंकागी, अधूरी और प्रकृतिक तथा जीवन विरोधी है।

Friday, April 8, 2011

अन्ना हजारे....... वंदेमातरम

आज सभी अपने अपने तरीके से भ्रस्टाचार के खिलाफ इस मुहीम में शामिल है कोइ फेसबुक,ट्विटर,ब्लोग्स मे़ल.तो कोई रैली निकल कर ,कोई केंडिल जला कर.लगता है ये पूरा हिंदुस्तान एक हो गया है गांव कस्वा सभी जगह सिर्फ अन्ना हजरे के समर्थन में आगे आ रहा है.मै भी अपनी भावना आपके साथ बाट रहा हू........

हिंदुस्तान आज एक नया इतिहास लिखने वाला है

भ्रष्टाचारी का बैण्ड बजने वाला है

लोकपाल विधेयक पास होने वाला है

बेफोर्स से लेकर स्पेक्ट्रम घोटाला

नहीं चलेगा किसी का बोलवाला

अन्ना हजारे की ये आंधी

सभी भ्रष्टाचारी को उखार फेकेगी

जो आवाज दिल्ली में उठी

उसकी गूंज संसद को हिला कर रख देगी

ये सरकार हर हिन्दुस्तानी को

एक एक पैसा का हिसाब देना परेगा

भ्रष्टाचारी नेता को सारा पैसा भारत सरकार को देना परेगा

स्विसबैंक में जमा सारा रूपया भारत को लोटाना परेगा.

हमें एक इतिहास लिखना है यह संकल्प लेना होगा.

जय हिन्द,वंदेमातरम