साइबर कानून एवं अपराध



किसी संस्था के विरुद्ध
इस प्रकार के अपराध सामान्यत: किसी सरकारी, निजी संस्था, कंपनी या किसी समूह के खिलाफ हो सकते हैं. ये अपराध भी हैकिंग, क्रैकिंग द्वारा अथवा गैरकानूनी ढंग से सूचनाओं को प्राप्त करने और उन का इस्तेमाल किसी संस्था या सरकार के विरुद्ध कर के किए जाते हैं. पाइरेटेड सौफ्टवेयर का वितरण एवं अन्य प्रकार के गैरकानूनी कंप्यूटर संबंधी कार्यों से संबंधित अपराध इस श्रेणी में आते हैं.
समाज के विरुद्ध
ये अपराध किसी व्यक्ति या संस्था के विरुद्ध ही सीमित न रह कर संपूर्ण समाज को प्रभावित करते हैं. इस प्रकार के अपराधों में पोर्नोग्राफी तथा अश्लील सामग्री या ट्रैफिकिंग जैसे अपराध शामिल होते हैं.
विभिन्न प्रकार के साइबर अपराध
हैकिंग
यह सब से ज्यादा प्रचलित साइबर अपराध है. सूचना प्रौद्योगिकी ऐक्ट 2000 में इस प्रकार के अपराधों को बताते हुए कहा गया है, ‘‘जो भी जानबूझ कर या बिना जाने किसी गलत कार्य द्वारा पब्लिक या व्यक्ति को हानि पहुंचाता है अथवा पहुंचाने का प्रयास करता है उसे हैकिंग कहते हैं. इस प्रकार के अपराधों में कंप्यूटर पर ही सूचनाओं को गैरकानूनी ढंग से अधिगृहीत कर नुकसान पहुंचाने का कार्य किया जाता है.’’
सुरक्षा से संबंधित अपराध
इंटरनैट तथा नैटवर्क की तेज रफ्तार से वृद्धि के साथ नैटवर्क सुरक्षा बहुत महत्त्वपूर्ण हो गई है. निजी गुप्त सूचनाओं को आमजन तक प्रचारितप्रसारित करना ही सुरक्षा व्यवस्था से संबंधित अपराधों की श्रेणी में आता है. यह कार्य नैटवर्क पौकेट स्निफर द्वारा किया जा सकता है जो संपूर्ण सूचनाओं को छोटेछोटे टुकड़ों में बांट कर उन का पुन: वितरण और प्रचारप्रसार करते हैं. ये नैटवर्क पौकेट स्निफर एक सौफ्टवेयर तकनीक को विकसित करते हैं तथा उपभोगकर्ता को उपयोगी सूचनाएं ग्रहण करने हेतु खाता संख्या एवं पासवर्ड उपलब्ध करवाते हैं. सुरक्षा व्यवस्था को इस से गंभीर खतरा उत्पन्न होता है.
इंटरनैट पर धोखाधड़ी
यह भी विशेष प्रकार का अपराध है. इंटरनैट कंपनियां इंटरनैट पर अपने उत्पादों की मार्केटिंग करती हैं. खराब उत्पादों की मार्केटिंग के लिए वे अपने ग्राहकों को गलत सूचनाएं दे कर उन्हें फंसाती हैं. इस प्रकार की कई भ्रामक और धोखाधड़ी वाली स्कीम्स को औनलाइन इंटरनैट द्वारा समाचारपत्र आदि द्वारा प्रस्तुत कर गबन करने के अनेक उदाहरण मिलते हैं.
क्रैडिट कार्ड धोखाधड़ी
यद्यपि इंटरनैट द्वारा मुद्रा का स्थानांतरण और लेनदेन करना बहुत आसान हो गया है, वहीं इस तकनीक ने कई प्रकार के साइबर अपराधों को जन्म भी दिया है. इन में मुख्य है, क्रैडिट कार्ड धोखाधड़ी. इस प्रकार के अपराध में किसी कार्डधारक के डिजिटल हस्ताक्षर बना कर उस के कोड नंबर की चोरी की जाती है. भारतीय सूचना प्रौद्योगिकी ऐक्ट 2000 की धारा 73 के अनुसार इस प्रकार के अपराधों के लिए 2 वर्ष तक का कारावास या 2 लाख रुपए जुर्माना अथवा दोनों दंड निर्धारित हैं.
                                                   By-Hemant Sarkar

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