फेसबुक डेटा लीक


डेटा लीक के मामले में आज अमेरिका में मार्क जुकरबर्ग सेनेट कॉमर्स ऐंड जूडिशरी कमिटियों के सामने पेश हुए होकर माफ़ी मांगी है....बस...

तो आज जाने डाटा चोरी कैसे होता है.....
एंड्रॉयड ऐप एक्सपर्ट श्वेतांक आर्य कहते हैं कि एंड्रॉयड फ्रेमवर्क में आमतौर पर दो तरह की परमिशन होती हैं... नॉर्मल परमिशन और सेंसिटिव परमिशन। नॉर्मल परमिशन के लिए ऐप आपसे इजाजत नहीं मांगते बल्कि ऐप इंस्टॉल करते ही यह परमिशन उन्हें मिल जाती है। वाईफाई, ब्लूटूथ, वॉलपेपर और अलार्म जैसी चीजें इसमें आती हैं, जबकि कैमरा, लोकेशन, माइक्रोफोन और स्टोरेज समेत कई तरह के हार्डवेयर स्टोरेज की इजाजत आपसे मांगी जाती है, जोकि खतरनाक साबित हो सकती है। आमतौर पर आप ऐप इंस्टॉल करते वक्त परमिशन दे भी देते हैं क्योंकि कई ऐप्स बिना इन परमिशन के डाउनलोड ही नहीं होते। बेशक परमिशन देने का मतलब होता है कि आपने उन्हें अपने घर की चाबी दे दी। अब जैसा मन करेगा, कंपनियां वैसे ही डेटा का इस्तेमाल कर सकती हैं। इसमें सबसे खतरनाक बात यह है कि आपको डेटा चोरी के बारे में पता भी नहीं चलेगा। आप जब परमिशन दे देते हैं तो एंड्रायड फ्रेमवर्क भी उन्हें आपका डेटा लेने से नहीं रोकता...
ये अलग बात है की डाटा चोरी से आम इंसान कोई कोई फर्क नहीं पड़ता पर ये है तो गलत...
फेसबुक ही नहीं आपके बहुत से ऐसे ऐप है जिसे आप परमिशन दे देते है...
अगले कड़ी में जानते है....

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